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लघु सिंचाई विभाग चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट निविदा सूचना संख्या 17 में हुआ खेल

 

बांदा में अवर अभियंता जगपाल तथा स्वजाति अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता मिलकर टेंडर पूरे अपने चाहते देते हैं जानकारी के अनुसार टेंडर पुल होने से राजस्व की भारी क्षति होती है साक्ष के रूप में वित्तीय वर्ष में निविदा सूचना 17 या अन्य को कॉम्पटीव चार्ट को देखना चाहिए किन-किन दरो में ठेकेदारों को टेंडर किया गया है टेंडर पुल करने से अधीक्षण अभियंता अवर अभियंता जगपाल द्वारा मनमानी ढंग से निविदा की शर्तों में बदलाव किया जाता है अपने-अपने चाहतों ठेकेदारों से मोटी रकम लेकर कम रेट में एक दो प्रतिशत कम दर पर दिया जाता है जिससे राजस्व को करोड़ों रुपए की क्षति पहुंची है बता दे कि हाईड करने पारदर्शिता खत्म हो जाती जिस ठेकेदार एक दूसरे के कागज नहीं देख पाते हैं उदाहरण 17 18 19 में कोई भी ठेकेदार किसी दूसरे फॉर्म के कागज नहीं देख सकता निविदा सूचना 18/ee /2024 25 चेकडेम हाड़हामाफी, विकासखंड नरैनी विधानसभा नरैनी थाना बदौसा में मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना अंतर्गत चेकडैम मरम्मत का टेंडर निकला था जिसमें तीन फॉर्म डाले गए थे शर्ट दो के बिंदु 17 के अनुसार जिससे रूप में सगे संबंधी का शपथ पत्र लगाया है मेसर्स अरुण कुमार गुप्ता तथा मेसर्स गौतम ट्रेडर्स एवं मेसर्स विघ्नहर्ता इंटरप्राइजेज एंड कंस्ट्रक्शन ने भी प्रतिभाग किया सभी शपथ पत्र लगाया था जिसमें एक-एक शब्द समान है फिर भी एक फॉर्म तकनीक में आपात तथा अन्य दो फार्म पत्र कैसे हो सकती हैं जिसमें मनमानी की गई है तथा सत्ता पक्ष के दबाव में काम किया गया है सूत्र ने बताया कि गलत तरीके से टेक्निकल रूप से बाहर किया गया है तथा शर्त संख्या 2 के बिंदु संख्या 17 के अनुसार बाहर किया गया है, जबकि मै0 गौतम ट्रेडर्स ने भी उपरोक्त कागज को गलत तरीके से लगाया है l तथा सभी शपथ पत्र में जो लिखा है वही में सर्च गौतम के शपथ पत्र में भी लिखा है, चूकी अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता एवं अवर अभियंता तथा जे0 ई0 टी0 जगपाल तीनों एक ही जाति वर्ग के हैं, तथा तीनों एक होकर के पैसा लेकर के नियमों को ताक में रखकर विभाग में मन माफिक व्यक्ति को ठेका देते हैं व धन उगाही करते हैं पैसा न देने पर टेक्निकल को कैंसिल कर दिया जाता है ठीक इसी प्रकार इस बार भी मेजर्स गौतम ट्रेडर्स के कागज गलत होने के बावजूद उसकी फर्म को तकनीकी रूप से सही किया गया है जबकि सभी के कागज सही होने के बावजूद एक फर्म को किया गया है जो कि गलत है जब दोनों फर्म के शपथ पत्र के प्रत्येक शब्द में समानता है वह एक ही भाषा लिखी हुई है तो दोनों अलग-अलग रूप से सही और गलत कैसे हो सकती हैl उच्च अधिकारियों एवं निविदा समिति का रवैया पक्षपात पूर्ण है।

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